दो ध्रुवीयता का अंत
-(END OF BIPOLARITY)-
दो ध्रुवीयता का अर्थ-
यह ऐसी अंतरराष्ट्रीय स्थिति है जिसमें विश्व की शक्ति दो प्रमुख केंद्रों या ध्रुवों में विभाजित हो जाती है तथा विश्व राजनीति इन्हीं दो शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा या संतुलन पर आधारित होती है|
विश्व इतिहास में द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945) के पश्चात दो ध्रुवीयता की परिस्थितियाँ बनी जब पुरानी शक्तियां (ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी आदि ) कमजोर हो गईं तथा अमेरिका व सोवियत संघ दो नई महाशक्तियों के रूप में उभरे| इसे ही दो ध्रुवीयता कहा गया |
दो ध्रुवीयता के इस दौर में पूरी दुनिया दो ध्रुवों या गुटों में बँट गई जिनकी अपनी अलग-अलग विचारधारा थी| इन दोनों ध्रुवों में से एक का प्रतिनिधित्व अमेरिका ने किया जबकि दूसरे का सोवियत संघ ने किया।
इन दोनों महाशक्तियों के बीच प्रत्यक्ष युद्ध तो नहीं हुआ किंतु युद्ध जैसी परिस्थितियाँ बनी रहीं ; राजनीतिक, आर्थिक व विचारधारा की प्रतिस्पर्धा होने लगी; हथियारों को बढ़ाने की होड़ शुरू हो गई तथा एक दूसरे के समर्थक देशों में अप्रत्यक्ष युद्ध करवाए गए जैसे- कोरिया युद्ध , वियतनाम युद्ध ,अफगानिस्तान युद्ध । यही तो शीत युद्ध कहलाया जो द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्यात (1945 ) से सोवियत संघ के विघटन (1991 ) तक चलता रहा।
दो ध्रुवीयता का अंत क्या है ?
दो ध्रुवीयता की स्थिति 1945 से 1991 तक चली। 1991 में सोवियत संघ (USSR) का विघटन हो गया और यह टूटकर कई देशों में बिखर गया जिससे विश्व में केवल एक ही महाशक्ति बची - अमेरिका। इसी घटना को "दो ध्रुवीयता का अंत" कहा जाता है। 1991 के पश्चात विश्व में काफी वर्षों तक अमेरिका ही एकमात्र महाशक्ति बनी रही जिसका वैचारिक, आर्थिक, तकनीकी, रक्षा आदि क्षेत्रों में वैश्विक एकाधिकार बना रहा। यही वह समय है जब विश्व एक ध्रुवीय कहलाया |
आइए अब हम एकध्रुवीयता, द्विध्रुवीयता व बहुध्रुवीयता के मध्य अंतर को समझ लेते हैं :
सोवियत प्रणाली -
क्या है सोवियत प्रणाली?
कार्ल मार्क्स के विचारों से प्रेरित होकर ब्लादिमीर लेनिन ने 1917 में रुसी बोल्शेविक क्रांति को अंजाम दिया जिससे सोवियत संघ (U.S.S.R.) अस्तित्व में आया।
सोवियत संघ (U.S.S.R. )द्वारा अपनाई गई सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक व्यवस्था, विचारधारा व नीतियों आदि को सामूहिक रूप में सोवियत प्रणाली कहा गया।
U.S.S.R .= Union of Soviet Socialist Republic = समाजवादी सोवियत गणराज्य संघ = सोवियत सघ
सोवियत प्रणाली मार्क्सवाद और लेनिनवाद पर आधारित थी। इसमें सामानता आधारित समाज की स्थापना हेतु केंद्रीकृत योजना को अपनाया गया जिसका निर्देशन साम्यवादी दल करता था।
सोवियत प्रणाली की विशेषताएं निम्नलिखित हैं :
- सोवियत प्रणाली समाजवाद के आदर्शों से प्रेरित थी। इसमें पूंजीवादी व्यवस्था का विरोध शामिल था।
- यहां एक राज्य नियोजित अर्थव्यवस्था थी जो कि पंचवर्षीय योजनाओं के अनुसार संचालित होती थी।
- यहां केवल कम्युनिस्ट पार्टी को शासन का अधिकार था; कोई भी विपक्षी दल नहीं था।
- न्यूनतम जीवन स्तर की सुविधा सभी नागरिकों को सुनिश्चित की गई।
- सारी राजनीतिक शक्ति पार्टी के उच्च नेताओं (पोलित ब्यूरो) के हाथों में थी।
- राज्य सभी नागरिकों की शिक्षा ,स्वास्थ्य, रोजगार और आवास की व्यवस्था करता था।
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता (विचार-अभिव्यक्ति ,प्रेस, धर्म आदि) सीमित थी।
- मीडिया व शिक्षा पर सरकारी नियंत्रण था | सरकार की आलोचना को अपराध माना जाता था।
पूर्वी यूरोप के जिन देशों को समाजवादी प्रणाली की तर्ज पर ढाला गया उन्हें ही दूसरी दुनिया के देश या समाजवादी खेमे के देश कहा गया |
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समकालीन विश्व राजनीति